जब तक विदेशी निवेशक बिकवाल रहेंगे, तब तक बाजारों के लिए बढ़त में आना मुश्किल है।   कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, ऊंची मुद्रास्फीति तथा सख्त मौद्रिक रुख के मद्देनजर अभी एफपीआई की बिकवाली जारी रह सकती है।